Poetry in Hindi

हर सुभह

हर सुभह जब आकाश खिलता है सूरज निकलता है,खुशबु भर देता है  नयी ताज़गी से मेरे ह्रदय के दरवाजे पर एक आश की थाली में, प्यार भर लाता है वह तो मेरा मन , करवट बदलकर आँखे मूंद कर, उसे जाने को कहता है हर सुभह जब कोयल मुझे जगाती है शीतल पवन के पंख… Continue reading हर सुभह

Poetry in Hindi

एहसास

तुम न हो आसपास तो अधूरा सा लगता है दिल पर एक पत्थर सा हो ऐसा लगता है कैसे करू बयान किस तरह तुम छाये हो ज़िन्दगी से निकल गयी हो जान वैसा लगता है खुदा ने खुद को उतारा है ज़मीं पर तेरी रूह बनकर किस तरह मिलाया उसने मुजको मुझसे एक पत्थर पर… Continue reading एहसास